पगड़ियों :-
· राजस्थान में पगड़ीयों का एकमात्र संग्रहालय उदयपुर में पिछोला झील के किनारे बागोर की हवेली में है, जिसमें विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी सुरक्षित है।
· जोधपुर के कोट-पेन्ट को राष्ट्रीय पोशाक का दर्जा प्राप्त है।
· मेवाड की पगड़ी और मारवाड़ का साफा प्रसिद्ध हैं।
· मेवाड़ की उदयशाही पगड़ी तथा जोधपुरी साफा कशीदाकारी के लिए प्रसिद्ध हैं।
· मंदील पगड़ी – यह दशहरें के पर्व पर पहनी जाने वाली पगड़ी है।
· मोठड़े की पगड़ी – विवाह के अवसर पर पहने जाने वाली पगड़ी।
· छापद्वार – मेवाड़ में पगड़ी बांधने वाले व्यक्ति को छापद्वार कहते हैं।
· जयपुर की झाड़शाही/राजाशाही पगड़ी प्रसिद्ध है।
मेवाड़ की प्रचलित पगड़ियाँ :-
1. अमरशाही पगड़ी – महाराणा अमरसिंह-I
2. अरसी शाही पगड़ी – महाराणा अखैसिंह
3. उदयशाही – महाराणा उदयसिंह
4. स्वरूपशाही – महाराणा स्वरूपसिंह
5. भीमशाही – महाराणा भीमसिंह
मारवाड़ की प्रचलित पगड़ियाँ :-
1. जसवन्तशाही पगड़ी – महाराजा जसवन्तसिंह-I
2. सरदारशाही – महाराजा सरदारसिंह
3. उम्मेदशाही – महाराजा उम्मेदसिंह
4. गजशाही- महाराजा गजसिंह
राजस्थानी वेशभूषा :-
पगड़ियाँ :-
· पगड़ी पुरुषों द्वारा सिर पर बाँधी जाती है। जो मान-सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक होती है।
· राज्य में पगड़ियों का संग्रहालय – बागौर हवेली (उदयपुर)
· इस संग्रालय में विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी सुरक्षित है।
· उपनाम – पाग घुमालो, पेटा, लपेटो, बागा, साफा, पेचा, अमलो, फालियो, सेलो शिरोप्राण
· विशेष अवसर की पगड़ियाँ :-
1. लहरिया पगड़ी :- तीज के त्योहार पर पहने जाने वाली पगड़ी।
2. मंदील पगड़ी :- दशहरे के अवसर पर पहने जाने वाली पगड़ी।
3. मोठडे़ की पगड़ी :- विवाह/उत्सव के अवसर पर पहने जाने वाली पगड़ी।
· पाग – पाग उस पगड़ी को कहते हैं, जो लम्बाई में सर्वाधिक होती है।
· पेचा – जरीदार पगड़ी को पेचा कहा जाता है, पेचा में केवल एक ही रंग होता है यदि बहुरंग हो तो उसे मंदील कहा जाता है।
· ऋतुओं के अनुसार पहने जाने वाली पगड़ियाँ :-
1. बसन्त ऋतु – गुलाबी पगड़ी
2. ग्रीष्म ऋतु – फूल गुलाबी व बहरीया पगड़ी
3. वर्षा ऋतु – मलय गिरी पगड़ी
4. शरद ऋतु – गुल-ए-अनार पगड़ी
5. हेमन्त ऋतु – मोलिया पगड़ी
6. शिशिर ऋतु – केसरिया पगड़ी
7. होली के अवसर पर – फूल-पत्ति की छपाई वाली पगड़ी
8. राजस्थान में मेवाड़ की पगड़ी और जोधपुरी साफा प्रसिद्ध है।
9. मेवाड़ के महाराणाओं की पगड़ी बाँधने वाले व्यक्ति छाबदार कहा जाता है।
10. अकबर के काल में मेवाड़ में ईरानी पद्धति की अटपटी पगड़ी का प्रचलन था।
मेवाड़ की पगड़ियाँ :-
1. बरखारमा पाग – मेवाड़ की सर्वाधिक प्रचलित पाग।
2. उदयशाही पगड़ी – महाराणा उदयसिंह के काल में प्रचलित।
3. अमर शाही पगड़ी – महाराणा अमरसिंह के काल में प्रचलित।
4. अरसी शाही पगड़ी – महाराणा अरिसिंह के काल में प्रचलित।
5. भीमशाही पगड़ी – महाराणा भीमसिंह के काल में प्रचलित।
6. स्वरूप शाही पगड़ी – महाराणा स्वरूपसिंह के काल में प्रचलित।
· जोधपुरी साफा – इसका प्रचलन जसवन्तसिंह-I के काल में हुआ।
· सर प्रतापसिंह ने जोधपुरी साफा को देश-विदेश में विशेष पहचान दिलाई।
· राठौडी पेंच – राजस्थान में राजपूतों द्वारा सर्वाधिक पंसद की जाने वाली पगड़ी।
· राजस्थानी लोकगीत “जला” में इस पगड़ी का उल्लेख मिलता है।
· राजशाही पगड़ी/झाड़शाही पगड़ी/जयपुरी पगड़ी – जयपुर में प्रचलित।
· यह पगड़ी लाल रंग के लहरिये से बनी होती है जो केवल राजाओं के द्वारा पहनी जाती थी।
महत्वपूर्ण तथ्य :-
· पगड़ी गौरव एवं प्रतिष्ठा का सूचक मानी जाती है।
· जोधपुर में चूंदड़ी का साफा सर्वाधिक प्रयोग किया जाता है।
· जोधपुर/मारवाड़ में खिड़किया पाग सर्वाधिक प्रसिद्ध रही है। लेकिन वर्तमान में इस पाग का प्रयोग गणगौर पर ईसरजी के लिए किया जाता है।
· मारवाड़ की प्रमुख पगडियाँ – जसवन्तशाही, चूडाँवत शाही, शाहजहाँनी, मांडपशाही, मनशाही, राठौड़ी विजय शाही आदि।
· रोबिला साफा – मारवाड़ का प्रसिद्ध है।