पारसनाथ जी आरती - parasnath ji aarti
पारसनाथ प्रभु, पारसनाथ प्रभु हम सब उतारें थारी आरती पारसनाथ पारसनाथ हम सब उतारे थारी आरती हो… धन्य धन्य माता वामा देव…
पारसनाथ प्रभु, पारसनाथ प्रभु हम सब उतारें थारी आरती पारसनाथ पारसनाथ हम सब उतारे थारी आरती हो… धन्य धन्य माता वामा देव…
सोते सोते ही निकल गयी, सारी जिन्दगी, सारी जिन्दगी तेरी प्यारी जिन्दगी, बोझा ढोते ही निकल गयी, सारी जिन्दगी ॥ जनम लेत…
जैन धर्म के हीरे मोती, मैं बिखराऊं गली गली ले लो रे कोइ प्रभु का प्यारा, शोर मचाऊं गली गली दौलत की दीवानों सुन लो, ए…
पारस प्यारा लागो, चँवलेश्वर प्यारा लागो । थांकी बांकडली झाड्यां में, गैलो भूल्यो जी म्हारा पारसजी, म्हैं रस्तो कियां प…
पारस प्यारा लागो, चँवलेश्वर प्यारा लागो । थांकी बांकडली झाड्यां में, गैलो भूल्यो जी म्हारा पारसजी, म्हैं रस्तो कियां प…
एकीभावं गत इव मया य: स्वयं कर्मबन्धो घोरं दु:खं भवभव-गतो दुर्निवार: करोति। तस्याप्यस्य त्वयि जिनरवे! भक्तिरुन्मुक्तये …
(पं. फूलचन्दजी पुष्पेन्दु, खुरई) (१) मंगल-चरण-प्रभा आदिनाथ के श्री चरणों में, सादर शीश झुकाता हूँ। भक्तामर के अभिनंदन …
कविश्री वृन्दावनदास हे दीनबंधु श्रीपति करुणानिधानजी | यह मेरी विथा क्यों न हरो बेर क्या लगी || मालिक हो दो जहान के जिन…
कविश्री वृन्दावन दास (शैर की लय में तथा और रागिनियों में भी बनती है।) श्रीपति जिनवर करुणायतनं, दु:खहरन तुम्हारा बाना ह…
भक्तामर स्तोत्र भाषा (कमलकुमार शास्त्री कुमुद) भक्त अमर नत-मुकुट सुमणियों, की सुप्रभा का जो भासक। पापरूप अतिसघन-तिमिर …
चालीसा : भगवान् आदिनाथ (चाँदखेड़ी) (छंद: दोहा) शीश नवा अरिहंत को, सिद्धन करूँ प्रणाम । उपाध्याय आचार्य का ले सुखकारी न…
श्री भक्तामर का पाठ, करो नित प्रातः । भक्ति मन लाई, सब संकट जाये नशाई ॥ जो ज्ञान-मान-मतवारे थे, मुनि मानतुंग से हारे…
समाधि-भक्ति तेरी छत्रच्छाया भगवन्! मेरे शिर पर हो। मेरा अन्तिम मरणसमाधि, तेरे दर पर हो॥ जिनवाणी रसपान करूँ मैं, जिनव…
(ज्ञानोदय छन्द) जय जय जय जयवन्त जिनालय नाश रहित हैं शाश्वत हैं। जिनमें जिनमहिमा से मण्डित, जैन बिम्ब हैं भास्वत हैं। स…
मणुयणाइंद - सुर-धरिय-छत्तत्तया, पंचकल्लाण - सोक्खावली-पत्तया। दंसणं णाण झाणं अणंतं बलं, ते जिणा दिंतु अम्हं वरं मंगलं॥…
श्रीपति जिनवर करुणायतनं, दुखहरन तुम्हारा बाना है। मत मेरी बार अबार करो, मोहि देहु विमल कल्याना है॥ टेक॥ त्रैकालिक वस…
श्रीसिद्धभक्ति अथ पौर्वाह्निक (अपराह्निक) आचार्य-वन्दना-क्रियायां पूर्वाचार्यानुक्रमेण, सकलकर्मक्षयार्थं भाव-पूजा-वन्द…